Lord Shiva In Hindi : भगवान शिव को शंकर ,शम्भू ,भोले बाबा,महादेव,भेलनाथ और महाकाल के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव की उत्पत्ति स्वंय होने के कारण उन्हें स्वयंभू भी माना गया है। क्या आप जानते हैं कि सबसे पहला प्रेम विवाह भगवान शिव का ही हुआ था। माता पार्वती और भगवन शंकर के विवाह के शुभावसर को ही शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
1. भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है इसलिए शंकर भगवान की तीसरी आंख हमेशा बंद रहती है।
2. शिव शंकर को नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है क्यूंकि समुंद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया था जिसके कारण उनका शरीर नीला पड़ गया।
3. भगवान शंकर अनादि है…. अनादि का अर्थ होता है जो हमेशा से था ,हमेशा है और हमेशा ही रहेगा। इसीलिए भगवान शिव के माता-पिता नहीं है।
4. भरतनाट्यम करते समय भगवान शिव शंकर की जो मूर्ति को रखा जाता है उसे नटराज कहते हैं।
5. अगर किसी भी देवी -देवता की मूर्ति टूट जाएं तो उसकी पूजा नहीं की जाती परन्तु अगर शिवलिंग टूट जाने पर उसकी पूजा की जा सकती है।
6. जिस दिन शिव शंकर भगवान और माता पार्वती की शादी हुई थी उसी दिन को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
7. भगवान शिव की एक बहन भी थी जिसका नाम अमावरी था , जिन्हें माता पार्वती की जिद्द पर स्वंय हर हर महादेव ने अपनी माया से बनाया था।
8. शंकर जी पर कभी भी केतकी का फूल नहीं चढ़ता क्योंकि केतकी का फूल ब्रह्मा जी के झूठ का गवाह बना था।
9. भगवान शिव ने गणेश जी का सिर इसलिए काटा था , क्योकि भगवान शिव को माता पार्वती से मिलने न देने के कारण भगवान शिव न गणेश जी का सिर ही धड़ से अलग कर दिया था।
10. चन्द्रमा को भगवान शिव शंकर की जटाओं में रहने का वरदान हासिल है।
11. शिवलिंग पर कभी भी पानी के बिना बेलपत्र नहीं चढ़ाए जाते। कहा जाता है कि माता पार्वती हमेशा भगवान शिव की पूजा करते समय बेलपत्र चढ़ाना कभी भूलती नहीं थी।
12. शंकर भगवान के गले मे लिपटे हुए सांप का नाम वासुकि है। शेषनाग के बाद वासुकि को नागों का दूसरा राजा माना जाता है।
13. जिस बाघ की खाल पर भगवान शिव शम्भू बैठते हैं , उस बाघ (Tiger) को शिव जी ने खुद मारा था।
14. शिवलिंग और शंकर भगवान पर शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता क्योकि शंकर भगवान ने अपने त्रिशूल से जिस शंखचूड़ को भस्म किया था उसकी ही हड्डियों से शंख बना था।
15. तांडव करने के बाद भोले बाबा ने चौदह बार सनकादि के लिए डमरू बजाया था, जिससे संस्कृत व्याकरण यानि माहेश्वर सूत्र का आधार प्रकट हुआ।
